Thursday, 12 December 2013

कच्ची मिट्टी या बीच का बिच्छू... , ... कुट्टी और पुच्ची..


जितने मज़ेदार हुआ करते थे बचपन के खेल उतनी ही मज़ेदार थी बचपन के खेलों की शब्दावली। तब यारी-दुश्मनी निभाने, कमज़ोर खिलाड़ी या पक्के खिलाड़ी का पता लगाने और डैन चुनने के लिए मजेदार इशारे, खेल और शब्दावली हुआ करती थी। आईए इनको भी याद कर लें.....

पुकाई-
 हर खेल में डैन का फैसला पुकाई से हुआ करता था। पुकाई यानि सभी खिलाड़ियों द्वारा एक के ऊपर एक हाथ रखकर हाथों को उल्टा या सीधा खोलना। असमान हाथ लाने वाले को बाहर कर दिया जाता था। इस तरह पुकाई तब तक चलती रहती थी जब तक कोई एक बचा ना रह जाए। जो अंत में बचता था वहीं डैन होता था।

कच्ची मिट्टी-
कच्ची मिट्टी यानि कमज़ोर खिलाड़ी। जैसा कि अक्सर होता है जब बड़े बच्चे खेल रहे होते थे और उनमें से किसी का छोटा भाई बहन खेलने की ज़िद करता था, तो बड़े बच्चे उसका दिल रखने के लिए उसे खिलाने को तैयार तो हो जाते थे लेकिन उसे कच्ची मिट्टी करार कर दिया जाता था। यानि उसका आउट होना आउट होना नहीं माना जाएगा, वो डैन नहीं बनेगा... जैसी सुविधाएं उसके लिए होती थी।

बीच का बिच्छू-
किसी कमज़ोर या बेहद मज़बूत खिलाड़ी को बीच का बिच्छू बनाया जाता था। मतलब वह खिलाड़ी दोनों की तरफ से खेल सकता है। अगर आप अंत्याक्षरी जैसा खेल खेल रहे हैं तो किसी बड़े को बीच का बिच्छू बना दो। यह बीच का बिच्छू दोनों टीमों की बड़ी मदद करता है और दोनों को खेल में डटा रहने में सहयोग करता है।

कुट्टी और पुच्ची- 
अपने दोस्तों से लड़ाई या प्यार दिखाने का सबसे क्यूट तरीका। अगर किसी दोस्त से लड़ाई हो गई है तो उससे कुट्टी कर दी जाती थी। कुट्टी में "दो दिन की छुट्टी, तेरी मेरी कुट्टी" कहकर अंगूठा दिखाया जाता था। और अगर किसी से वापस दोस्ती हुई है तो पुच्ची की जाती थी। दोनों के अलग-अलग इशारे होते थे। कई बार ज्यादा झगड़ा होने पर पक्की कुट्टी और ज्यादा प्यार उमड़ने पर पक्की पुच्ची होती थी।