Friday, 21 March 2014

भारतीय पनडुब्बियां क्यों ले रही हैं अपने ही नौसेनिकों की जानें...?



पिछले 7 महीनों में नौसेना में हुए ग्यारह हादसों में 21 लोगों की जानें गईं हैं। ज्यादातर मामलों में कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन इनमें से सिंधुघोष क्लास की पनडुब्बियों में हुई दो दुर्घटनाओं में 20 लोगों की जानें जा चुकी हैं। यह दोनों रूसी पनडुब्बियां थी। जब हमने इनकी पड़ताल की तो कुछ चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं।

भारत द्वारा रूस से लीज़ पर ली गई परमाण्विक पनडुब्बी नेरपा के-152 का भी कुख्यात इतिहास है। इसे भारतीय नौसेना में आईएनएस चक्र के नाम से कमीशन किया गया है।

सिंधुघोष क्लास की लगभग सभी दस पनडुब्बियां रूस से भारी रीफिटिंग के बाद तब ली गई हैं जब रूस ने इनका इस्तमाल या तो कम कर दिया था या बन्द कर दिया था मतलब नौसेना की भाषा में वो या तो डीकमीशन कर दी गईं थी या फिर डीकमीशन होने की कगार पर थी।

चूंकि यह मामला बेहद संवेदनशील है, हम इन जानकारियों को आपसे बिल्कुल वैसे ही साझा कर रहे हैं जैसे यह हमें मिली। हम यह नहीं कह सकते कि यह जानकारी नौसेना में लगातार हो रही दुर्घटनाओं के कारणों की विवेचना करती है या नहीं, लेकिन इस बात पर ज़रूर प्रकाश डालती है कि हम रक्षा खरीद उपकरणों के लिए किस तरह के सौदे कर रहे हैं और इन मामलों में किस कदर लापरवाही बरती जा रही है जिसके चलते दुर्घटनाओं की संख्या में इज़ाफा हो रहा है और हमारे सैनिक सीमा पर युद्ध में नहीं घर में शांति के दौरान शहीद हो रहे हैं।


सिन्धुघोष क्लास (किलो क्लास सबमैरीन्स)

यह सभी डीजल-इलैक्ट्रिक पावर्ड पनडुब्बियां हैं। इनमें एस्केप वाहन नहीं होता। भारत के पास सिन्धुघोष क्लास की कुल दस पनडुब्बियां है जो सभी रूस निर्मित हैं। इनमें से एक, आईएनएस सिंधुरक्षक (एस 63) पिछले साल 14 अगस्त को आग लगने से हुए धमाकों और नुकसान के बाद डूब चुकी है और अब भारत के पास केवल 13 पनडुब्बियां बाकी हैं।


आईएनएस सिंधुरक्षक (आईएनएस-63) से जुड़े कुछ तथ्य

· सिंधुरक्षक, सिन्धुघोष क्लास की नौंवी सबमैरीन थी जिसे 24 दिसम्बर 1997 को भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया था। 2010 में इसमें एक छोटी आग लगने की दुर्घटना हुई थी जिसके बाद मॉस्को स्थित रूसी फर्म - ज्योज़डोका शिप रिपेयर कम्पनी (Russian Zvyozdochka ship repair company) को 80 मिलियन यूएस डॉलर में इसे अपग्रेड और ओवरहॉल (मरम्मत) करने के लिए ठेका दिया गया था।

· 14 अगस्त 2013 को आईएनएस सिंधुरक्षक जब मुम्बई के हाईसिक्योरिटी डॉकयार्ड में थी तब रात के समय उसमें धमाके हुए जिसमें तीन अधिकारियों और 15 नाविकों समेत कुल 18 लोग जल कर मर गए।

· यह सारे विस्फोट पनडुब्बी के अगले भाग में हुए जहां इसकी टॉरपीडोज और मिसाइल्स रखी जाती हैं।

· यह विस्फोट इतने ज़बरदस्त थे कि पनडुब्बी धमाके के साथ पानी में डूब गई। नौसैना के नाविकों ने हाई पावर अंडरवॉटर लैम्प्स इस्तमाल करके लगभग 36 घंटे तक आईएनएस सिंधुरक्षक की तलाशी ली थी और तब जाकर नाविकों के शव बरामद हो पाए थे। यह शव इस बुरी तरह झुलस चुके थे कि इनकी पहचान के लिए इनको नौसेना के आईएनएचएस अश्विनी अस्पताल में भेजकर इनका डीएनए टैस्ट करना पड़ा।

· विस्फोट से पनडुब्बी का इंटरनल हल पिघल गया था जिसके कारण दूसरे कम्पार्टमेन्ट्स में जाने में बाधा उत्पन्न हो गई थी। रास्ता रुकने के कारण एक बार में केवल एक ही नाविक इससे निकल सकता था।
· एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि 16 साल पुरानी यह पनडुब्बी जिसमें कि 2010 में भी एक हादसा हो चुका था हाल ही में रूस में ढाई साल तक इलैक्ट्रॉनिक वारफेयर और इंटीग्रेटेड वैपन्स कंट्रोल सिस्टम में अपग्रेडेशन के बाद लौटी थी।

· इस भयंकर दुर्घटना के बाद ज्योज़डोका कंपनी, जिसने कि आईएनएस सिंधुरक्षक पनडुब्बी की रिफिटिंग की थी ने बयान जारी करके कहा था कि जनवरी में जब इसे भारत भेजा गया था तो यह पूरी तरह से ऑपरेशनल थी।

· वहीं ज्योज़डोका कंपनी के एक अनजान प्रवक्ता ने आरआईए नोवोस्ती (रूसी अंतर्राष्ट्रीय समाचार एजेंसी) को बताया था-‘हमने एक लाइट ओवरहॉल और आधुनिकीकरण के लिए जून 2010 में एक अनुबन्ध पर हस्ताक्षर किए थे और जनवरी 2013 तक रीफिट पूरा कर लिया गया। मरम्मत के दौरान हमने एक नया क्लब रॉकेट कॉम्प्लेक्स लगया था और कुछ भारतीय उपकरणों के साथ विदेशी सिस्टम भी शिप पर लगाए थे। सबमैरीन के नेविगेशन और कम्यूनिकेश सिस्टम और इसके पावर जनरेटर की ओवऱहॉलिंग की गई थी”।

· और अब एक ध्यान देने लायक बात- उस प्रवक्ता ने आगे कहा था कि“जब आईएनएस सिंधुरक्षक बेरेन्ट्स समुद्र के सेवेरोनिस्क पोत (Severonisk port on the Barents Sea) पर खड़ा था तब जिन विशेषज्ञों ने इसकी जांच की थी उन्होंने कुछ चिंता के मुद्दे उठाए थे। लेकिन जब भारत में इसे रिसीव किया गया तो भारत ने इस डीजल से चलने वाली पनडुब्बी पर कोई ऐतराज नहीं उठाया।”

· जब आईएनएस सिंधुरक्षक पर विस्फोट हुआ तब वह रूसी वॉरंटी के अंतर्गत थी और रूसी कंपनी के 8 कारीगर भी मुम्बई पोत पर ही थे।

· फिलहाल समुद्र से इसे सलामत निकालने का ठेका यूएस की एक मैरीन फर्म को दिया गया है। एक बार इसे निकाले जाने और इसकी जांच करने के बाद यह फैसला लिया जाएगा कि सिंधुरक्षक वापस काम में आने लायक है या नहीं।

आईएनएस सिंधुरत्न (आईएनएस 59) की कहानी

· आईएनएस सिन्धुरत्न पिछले महीने 26 फरवरी को सीट्रायल्स के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी जिसमें लेफ्टिनेंट कमांडर कपीश मुवाल और लेफ्टिनेंट मनोरंजन कुमार शहीद हो गए। जांच में पाया गया की स्मोक केबल्स से धुंआ उठने के कारण यह दुर्घटना हुई थी।

· सिंधुरत्न का निर्माण 1988 में हुआ था। यह 24 साल पुरानी सबमैरीन है।

· इसके बारे में कहा जाता है कि इसे काफी बड़े रीफिट के बाद तब भारतीय बेड़े में शामिल किया गया था जब रूसी नौसेना ने इसे डीकमीशन कर दिया था।


अटैक सबमैरीन आईएनएस चक्र का भी है कुख्यात इतिहास

· भारत की महत्वाकांक्षी अटैक सबमैरीन- आईएनएस चक्र जो कि भारत ने रूस से दस साल की लीज़ पर ली है एक न्यूक्लीयर पावर सबमैरीन है। यह रूसी नौसेना की चूका बी (Shchuka B) क्लास की पनडुब्बी है और सोवियत नेवी में- के-152 नेरपा के नाम से जानी जाती थी। इसका नाटो नाम अकुला सेंकड है।

· रूस में 1993 में इसका निर्माण शुरू किया गया था लेकिन फंडिंग की कमी के कारण इसे रोकना पड़ा। 2004 में भारतीय नौसेना ने इसके निर्माण और समुद्री ट्रायल के लिए इस शर्त पर आर्थिक मदद दी कि इसे 10 साल के लिए भारत को लीज़ पर दिया जाएगा।

· अक्टूबर 2008 में इसे नेरपा के-152 के नाम से लांच किया गया। जब जापान के समुद्र में इसका ट्रायल चल रहा था तब 9 नवम्बर 2008 को ब्लाडीवोस्टक के पास इसमें आग लग गई। हादसे के समय नेरपा पर 81 रक्षा जवानों के साथ 208 लोग मौजूद थे। इस जहाज का फायर सप्रेशन सिस्टम शुरू हो जाने से टॉक्सिक गैस लीक होने लगी कारण 20 नाविक मारे गए और 21 लोग घायल हो गए। यह रूसी नौसेना इतिहास का एक बड़ा हादसा माना जाता है।

· हादसे के एक ही हफ्ते बाद भारतीय नाविकों का दल इस पनडुब्बी पर ट्रेनिंग लेने जाने वाला था।

· हांलाकि इस हादसे के बाद इसे भारत में लीज़ द्वारा लेने पर कुछ विवाद ज़रूर हुआ लेकिन बाद में सहमति बन गई।
 
· इसके बाद नेरपा पर लगभग ढाई साल तक रीफिटिंग का काम चलता और जनवरी 2012 में 920 मिलियन अमेरिकी डॉलर में इसे भारत को लीज़ पर दे दिया गया।

· 4 अप्रैल 2012 को इसे औपचारिक रूप आईएनएस चक्र के नाम से नौसेना में कमीशन किया गया।

· 8,130/12,770 टन के विस्थापन और 30 नॉट्स की अधिकतम गति के साथ के-152 सबमैरीन चार 533 मिमी टॉरपीडो ट्यूब्स और चार 650 एमएम टॉरपीडो ट्यूब्स से सुसज्जित है।

· लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सबमैरीन जब कि भारत को दी गई तो उसमें इस क्लास की सबमैरीन से अलग कुछ बदलाव किए गए थे।

· रूसी नेवी की चूका बी क्लास की पनडुब्बियां परमाण्विक या कन्वेन्शन वारहैड्स की 28 क्रूज़ मिसाइल्स के साथ होती हैं जिनकी मारक क्षमता 3000 किमी तक होती है। जबकि भारत को जो चूका बी क्लास सबमैरीन नेरपा दी गई उसमें 300-किमी तक मार करने वाली क्लब मिसाइल्स लगाई गईं जो कि पहले से ही रूस द्वारा भारत के लिए निर्मित क्रिवेक क्लास फ्रिगेट्स और किलो क्लास पनडुब्बियों में मौजूद लगी हुईं थीं (आईआरए नोवोस्ती की खबर)। 

कुछ अन्य तथ्य भी जानिए


· 17 जनवरी 2014 को आईएनएस सिन्धुघोष में भी हादसा हो चुका है जब मुम्बई डॉकयार्ड में खड़ी यह पनडुब्बी ग्राउंड पर चली गई थी। उस समय यह पूरी तरह शस्त्रों से सुसज्जित थी। हांलाकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ।

· सिन्धुकृति (एस 61)सबमैरीन 2007 से विशाखापटनम के रीफिट यार्ड में खड़ी है। इसमें मरम्मत का कार्य चल रहा है।

· शिशुकुमार क्लास की भी चार पनडुब्बियों समेत इस समय भारत के पास कुल 13 पनडुब्बियां हैं। लेकिन इनमें से सभी 13 पनडुब्बियां कभी भी सही और ऑपरेशनल अवस्था में नहीं रहती। केवल 7 से 9 पनडुब्बियां ऑपरेशनल रहती हैं और बाकी पनडुब्बियों में हमेशा ही मरम्मत या रीफिटिंग का काम चलता रहता है जिसके कारण वो डॉकयार्ड में खड़ी रहती हैं।

 भारत में बनी परमाण्विक शक्ति वाली पनडुब्बी आईएनएस अरिहन्त अभी तक ऑपरेशनल नहीं हो पाई है।100 मीटर से ज्यादा लम्बी इस सबमैरीन का तीन सालों से विशाखापटनम में ट्रायल चल रहा है। इसी महीने 8 मार्च, 2014 को इस पर चल रहे काम के दौरान एक ठेका मजदूर मारा गया।

· भारत के पास अब तक 24 सबमैरीन्स होनी चाहिए थी लेकिन केवल 13 सबमैरीन्स हैं। इनमें से अधिकतर अपनी आयु पूरी कर चुकी हैं। 2017 तक सभी 25 साल की अपनी उम्र को पूरी कर लेंगी।

आईएनएस विक्रमादित्य पर भी घट गई घटना

· 45,000 टन का एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य, जिसे पहले एडम गोर्शकोव कहा जाता था और हाल ही में भारतीय नौसेना में भेजा गया है, का भी 2.3 बिलियन डॉलर्स की लागत के साथ उत्तरी रूस के शेमाश शिपयार्ड में रीफिट और आधुनिकीकरण किया गया है। 7 जनवरी 2014 को 39 दिन की यात्रा पूरी करके यह भारत पहुंचा। लेकिन यात्रा के दौरान इसके साथ भी हादसा पेश आया। इस पर मौजूद 8 में से एक स्टीम बॉयलर फेल हो गया।


भारत रूसी रक्षा संबंधों पर एक नज़र डाल लेते हैं..

· भारत और रूस के रक्षा संबंध 1960 से चल रहे हैं। हांलाकि हाल के समय में भारत ने पश्चिमी देशों खासकर यूएस और इस्त्राइल से रक्षा उपकरण मंगाने की कोशिशे की हैं लेकिन भारत का 70 फीसदी रक्षा हार्डवेयर अभी भी रूस से ही सप्लाई किया जाता है।

· भारत 80 के दशक के अंत में एक रूसी चार्ली क्लास न्यूक्लीयर सबमैरीन को भी ऑपरेट कर चुका है जो कि रूस से लीज़ पर ली गई थी।

· रूस मुख्यत ईरान, चीन, पोलेन्ड, रोमानिया और अल्जेरिया को पनडुब्बिया बेचता है। भारत भी रूस के लिए मुख्य बाज़ार है। आईएनएस चक्र की लीज़ के अलावा भारत 10 वर्शाव्यान्कास (किलो क्लास/ भारत की सिन्धुघोष क्लास) की सबमैरीन्स मंगा चुका है। जिनमें से 6, 3M-54 Klub-S मिसाइल सिस्टम से सुसज्जित थी। रूस भारत के साथ ब्राह्मोस मिसाइल भी विकसित कर रहा है।

· मुम्बई के माजेगांव डॉक्स लिमिटेज में फ्रांसीसी तकनीक से आधा दर्जन डीजल पावर्ड सबमैरीन्स को बनाने का कार्यक्रम चल रह है लेकिन मंहगी कॉस्ट और टाइम ओवररन्स के कारण यह प्रोजेक्ट फिलहाल रुका पड़ा है।

(हिन्द प्रहरी से)