Monday, 9 December 2013

डोन्ट अन्डरएस्टीमेट द पावर ऑफ अ कॉमन मेन....


"डोन्ट अन्डरएस्टीमेट द पावर ऑफ अ कॉमन मेन..." फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस का यह डायलॉग आज पूरी तरह से प्रासंगिक हो गया है। कल तक जिस कॉमन मेन पर ना तो जनता विश्वास दिखा रही थी, ना कोई चैनल जिसे भाव दे रहा था और ना ही जिसे बीजेपी या कांग्रेस के नेता अपने बराबर खड़े होने लायक मान रहे थे, आज उस कॉमन मेन ने एक वार में सबको चित्त कर दिया।  कल तक केजरीवाल को सड़क की पार्टी कहने वाले कांग्रेसी नेता मुंह छिपाते फिर रहे हैं। सालों से जीतते आ रहे दिग्गज नेता आम चेहरों से हारने के बाद सद्मे में हैं।
 आप को सिर्फ 6 सीटें मिलने की भविष्यवाणी करने वाले चैनलों और अखबारों में आज कुछ इस तरह की हैडलाइन्स हैं...बीजेपी विनर, कांग्रेस ज़ीरो, आप हीरो.., केजरीवाल ने झाड़ू फिराई.., हर तरफ आप ही आप... , कांग्रेस साफ, भाजपा खिली, आगे आप... । कल तक केजरीवाल को भाव ना देने वाले चैनल्स आज आप उम्मीदवारों की प्रतिक्रिया जानने को माइक और कैमरा लेकर उनके आगे-पीछे घूम रहे हैं।

और तो और, जनता को भी विश्वास नहीं हो रहा है कि आप ने इतना जबरदस्त धमाका कर दिया है। हर पान की दुकान और चाय की टपरी पर सिर्फ आप की जीत के बारे में डिस्कशन हो रहा है।

इस आश्चर्यजनक और धमाकेदार जीत ने ना सिर्फ आम आदमी की ताकत फिर से दिखा दी है बल्कि कुर्सी को अपनी बपौती समझ कर सोए राजनेताओं को भी नींद से जगाने का काम किया है। इस जीत में सबके लिए सबक है...

अब तो समझ जाओ कांग्रेस-

-उम्मीद है मैडम जी अब आपको, आपके सुपुत्र को और आपके चमचों की पार्टी को यह समझ आ गया होगा कि जनता बेवकूफ नहीं है, आप उन्हें चाहे 1 रूपए में चावल और अनाज दें, चाहें मुफ्त में मोबाइल और लैपटॉप बांटे या मुफ्त के घरों का झांसा दें, जनता जानती है कि मुफ्तखोरी की आदत डालकर आप उन्हें बना तो भिखारी ही रहे हैं और जनता भिखारी बनने से इनकार करती है। आपने महंगाई का बिगुल बजा कर जनता के मुंह से रोटी छीनी जनता ने वोटों का हथियार चलाकर आपके नीचे से कुर्सी ही खींच ली... अब पता चला गिरने का दर्द...?
-प्रिय सुशील कुमार शिंदे जी अब तो आप जान गए होंगे कि जनता कुछ नहीं भूलती। बल्कि जनता का इंसाफ तो भगवान की लाठी की तरह है जो बिना आवाज़ के पड़ती है और क्या खूब पड़ती है। आपकी कांग्रेस को पड़ गई... और अभी आगे भी पड़ेगी.. लोकसभा चुनाव भी हैं, बस देखते जाईए।

-'हाथ' की छत्रछाया में चलने वालों अब समझ में आया कि महगांई, भ्रष्टाचार और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गलत नीतियां बनाने का परिणाम क्या होता है। उज्जवल भविष्य का झांसा देकर कमरतोड़ महंगाई देने वालों और नेताओं के भ्रष्टाचार को कमेटियों की आड़ में छिपाने वाले 'हाथों' को ऐसे ही 'कमल' और 'आप' पड़ते हैं।

-और तैंतालीस साल के युवा नेता राहुल गांधी जी आपको भी पता चल गया होगा कि आप कितने बड़े स्टार प्रचारक हैं...। जनता ने मैडम साहिबा के युवराज को उनकी औकात दिखा दी है।

ज्यादा खुश मत हो भाजपा..



-आपको बधाई भाजपाईयों। चार में से तीन राज्यों में आपने शानदार जीत हासिल की है और राजधानी दिल्ली में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरे हैं। आप जश्न मना सकते हैं। आपके पास वजह है। लेकिन यह ना भूलें कि आप इसलिए नहीं जीते कि लोगों ने आपको चुना है, बल्कि इसलिए जीते कि जनता ने कांग्रेस को नकारा है। जहां भाजपा के अलावो अन्य विकल्प ही नहीं था वहां लोगों ने भाजपा को वोट देकर विजयी बनाया और जहां ( दिल्ली में ) लोगों को दूसरा विकल्प मिला, वहां आपको सरकार बनाने के लाले पड़ते दिख रहे हैं।

-प्यारी भाजपा आपको दूरदर्शिता से काम लेने की जरूरत है। क्योंकि आपको अपनी राजनीति का फायदा कम मिला है, कांग्रेस के अनीतियों, भ्रष्टाचार और उसके एकमात्र विकल्प होने को फायदा ज्यादा मिला है। जब दिल्ली में 'आप' के कारण भाजपा का यह हाल है तो सोचिए अगर बाकी राज्यों में भी 'आप' के प्रतिद्वंदी होते तो क्या भाजपा इतनी आसान जीत हासिल कर पाती...?

-कांग्रेस के साथ भाजपा को भी आत्ममंथन करना है कि उसे भी अब अपनी पारम्परिक राजनीतिक सोच और मंदिर मस्जिद की राजनीति से ऊपर उठकर आम आदमी के आम मुद्दो पर वाकई में काम करना पड़ेगा वरना कोई बड़ी बात नहीं कि आगे के चुनावों में आप लोग भी कांग्रेस के साथ इक्का दुक्का सीटों पर खड़े नज़र आएं।

नेताओं और मी़डियाकर्मियों अब तो सुधर जाओ....

-आम आदमी पार्टी के जीतने के बाद देश भर के मीडिया की हालत भी देखने लायक हो गई है। सात दिसंबर यानि नतीजों के एक दिन पहले तक कोई भी न्यूज़ चैनल या अखबार आम आदमी पार्टी को कहीं गिन ही नहीं रहा था। कई अखबारों और चैनलों पर तो साफ-साफ भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवारों के बीच की लड़ाई का ज़िक्र किया गया। आप और उसके उम्मीदवारों का तो ज़िक्र ही नहीं किया गया।

- रविवार सुबह तक मीडिया के लोग आप और आप के उम्मीदवारों को बेहद हल्के में लेकर चल रहे थे और शाम होते-होते सबके सुर बदल गए। आप को कहीं खड़ा नहीं करने वाली मीडिया के लोग शाम होते होते आप नेताओं की बाइट के लिए भागते दिखे।

-हर चैनल में सभी पार्टी के प्रत्याशिय़ों का बायोडाटा तैयार करके रखा जाता है कि हार या जीत के बाद उसको दिखाया जा सके। लेकिन चैनलो और अखबारों ने आप को इतना कमतर आंका कि इनके उम्मीदवारों के नाम तक की लिस्ट ठीक से नहीं बनाई गई और शाम को किसी भी चैनल पर किसी विजयी आप प्रत्याशी की बायोडेटा या बैकग्राउंड संबंधी न्यूज़ देखने को नहीं मिली। आप की इस जीत ने मीडिया को भी चौंकाया है और उन्हें अच्छा सबक दिया है।

-एक सबक उन सभी नेताओं के लिए भी है जो एक दिन पहले तक आप पर फिकरे कस रहे थे और उन्हें प्रतिद्वंदी तक मानने को तैयार नहीं थे, वो दूसरे दिन 'हार' का गम ओढ़े अपना मुंह छिपाते फिर रहे थे।

-एग्ज़िट पोल कराने वाली कंपनिया और उन्हें ज़ोर शोर से दिखाने वाले न्यूज़ चैनल्स को शायद य़ह सबक भी लेना चाहिए कि इनका कोई फायदा नहीं। बार बार एग्ज़िट पोल दिखाने और परिणाम अक्सर उलट आने के कारण दरअसल चैनल्स की क्रेडिबिलिटी ही सवालों के घेरे में आती है। बेहतर है आगे से एग्ज़िट पोल की बजाय कोई और रचनात्मक कार्यक्रम दिखाए जाएं।


टिके रहना है तो 'आप' को करके दिखाना होगा....



डीयर 'आप', आप को जनता ने चुन लिया है। जनता ने अपना काम कर दिया और अब काम करने की बारी आपकी है। कृपया अपनी बातों और वादों पर अटल रहें, उन्हें निभाएं और कुछ अच्छा बदलाव लाकर दिखाएं। कांग्रेस और बीजेपी की हालत से और खुद अपनी जीत से सबक लें। और जैसा कि आप खुद देख ही चुके हैं, अगर आपने भी वो सब नहीं किया जिसकी उम्मीद में जनता ने आपको यहां तक पहुंचाया है तो याद रखें जनता 'आप' की उम्मीदों पर भी झाड़ू फिराने में भी देर नहीं लगाएगी।

 एक बात और आदरणीय केजरीवाल जी, पब्लिक ने आपको जो मैंडेट दिया है उसकी इज्जत कीजिए। अगर आपको सिर्फ अपने बलबूते पर ही सरकार बनानी थी तो पहले बता देते। अगर दूसरी बार भी ऐसा ही हुआ जैसा अभी हुआ है तो क्या करेंगे, फिर से चुनाव,,? ऐसा मत कीजिए केजरीवाल जी, दोबारा चुनाव की बात मत करिए, जनता की पैसे की बरबादी की बात मत करिए। जो जीत मिली है उसका आनंद लीजिए और सरकार बनाने की बात कीजिए वरना कहीं ऐसा न हो कि मैजोरिटी पाने के चक्कर में आप इन सीटों को भी गंवा दें।