Tuesday, 3 September 2013

आधुनिक भारत की एक बच्ची के सपने, सीखें और सरोकार...

 साक्षात्कार की कड़ी में इस बार प्रस्तुत है देश की राजधानी दिल्ली में पढ़ने वाली एक ग्यारह वर्ष की बच्ची का साक्षात्कार।  आधुनिक भारत और  कम्प्यूटर युग में जीने वाले बच्चों की इच्छाएं, उम्मीदें, रोष और आक्रोश को लेकर जब हमने एक ग्यारह साल की बच्ची से सवाल पूछे तो बहुत रोचक जवाब मिले। इनकी दुनिया बिल्कुल अलग होती है, उसमें सपने भी है, आगे बढ़ने की इच्छा भी और यथार्थवादिता भी। यह बच्चे अपनी नज़र से दुनिया को देखते हैं, अपने तरीके से उसकी विवेचना करते हैं और अपने तरीके से ही उसमें ढलने और उसे बदलने की चाहत भी रखते हैं। यह जो कहते हैं मन से कहते हैं। झूठ बोलना और लाग-लपेट करना इन्हें नहीं आता.... किसी भी बात से इन्हें जज मत कीजिए। बस इस बच्ची के सपनों, सीखों और सरोकारों के बारे में पढ़िए, अपना बचपन याद कीजिए और आनंद लीजिए...


आपका परिचय..
मेरा नाम साक्षी बंसल है। मैं डीपीएस स्कूल, दिल्ली में सिक्स्थ क्लास में पढ़ती हूं। मेरे पापा और मम्मी दोनों डॉक्टर हैं और मैं उनको बहुत प्यार करती हूं। और मैं मार्स और स्विटज़लैंड घूमना चाहती हूं।

क्या बात है..., आपकी हॉबीज़..
डांस करना, गाना गाना, टेस्टी खाना खाना, एक्टिंग करना, बास्केट बॉल खेलना और फैशन करना।

फैशन करना...! आपके हिसाब से यह फैशन होता क्या है?
फैशन मतलब अच्छे और स्टायलिश कपड़े पहनना, सुंदर दिखना, स्मार्ट दिखना... जिससे सब आपकी तारीफ करें।

आप बड़े होकर क्या बनना चाहती हो साक्षी?
 वैसे तो मुझे बड़ा होकर आईएएस बनना है ताकि मैं सारे लोगों को कंट्रोल कर सकूं। लेकिन मुझे मालूम है आईएएस का एक्ज़ाम बहुत डिफिकल्ट होता है, इसलिए इसके साथ ही मैं इंजीनियरिंग की भी तैयारी करूंगी जिससे आईएएस ना बन पाऊं तो इंजीनियर बन जाऊं।

और इंजीनियर बनकर क्या करोगी?
मैं खूब सारी मशीन्स बनाऊंगी जैसे एक ऐसा बॉटल कैप बनाऊंगी जिसको लगाने से किसी भी बॉटल का पानी हमेशा ठंडा रहे। एक पोर्टेबल फ्रिज बनाऊंगी जिसे जब जाहे बड़ा करके रूम में रखा जा सके और जब चाहे छोटा करके कहीं भी ले जाया जा सके।

गुड...। आपने अपने मम्मी-पापा से क्या सीखा हैं?
पापा ने मुझे यह सिखाया है कि अगर हम एक्चुली में कुछ चाहे तो उसे जरूर अचीव कर सकते हैं। जैसे मैं दो सालों से अपने स्कूल में मार्कर कप के लिए कोशिश कर रही थी जो उसे मिलता है जिसके सारे सब्जेक्ट्स में सबसे अच्छे ग्रेड्स आएं...मैंने कोशिश की और आखिरकार मुझे मार्कर कप मिल ही गया। मेरी मम्मी ने मुझे यह सिखाया है कि हमें सबकी रेस्पेक्ट करनी चाहिए चाहें वो अमीर हो या गरीब, बड़ा हो या छोटा।

 आपको अपने मम्मी-पापा में क्या सबसे अच्छा लगता है और क्या खराब? 
सबसे अच्छा यह लगता है कि मम्मी पापा मुझे बहुत प्यार से समझाते हैं। गलती करती हूं तो थोड़ा डांटते हैं पर फिर प्यार भी करते हैं और मेरी गलती भी बताते हैं। और जो बात मुझे पापा की अच्छी नहीं लगती वो यह है कि वो मुझे मूवीज़ नहीं दिखाते और मम्मी की यह बात खराब लगती है कि वो पापा से रिक्वेस्ट नहीं करती कि साक्षी को मूवीज़ दिखाओ।

और कौन सी चीज़े हैं जो आपको अच्छी नहीं लगती?
जब मम्मी-पापा डांटते हैं तो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता। मुझे डांट खाने से नफरत हैं। इसके अलावा मुझे घर में शांति अच्छी नहीं लगती। शांति रहती है तो मैं बोर हो जाती हूं। मुझे दूध पीना और सुबह-सुबह उठकर स्कूल जाना भी अच्छा नहीं लगता क्योंकि जल्दी उठने के कारण मेरी नींद पूरी नहीं होती।

हीरोइन्स कौन सी पसंद हैं?  
करीना, केटरीना और आलिया। मुझे कैटरीना का स्टाइल पसंद है, करीना का टैलेंट और आलिया की सुंदरता...

आपके लिए दुनिया में सबसे ज़रूरी क्या है?
मेरी फैमिली, फ्रैंड्स और मेरी रेप्यूटेशन।

रेप्यूटेशन से क्या मतलब है आपका?
मतलब, सभी लोगों की नज़र में मैं हमेशा एक अच्छी लड़की बन कर रहूं। सब लोग यह कहें कि कितनी इंटैलीजेंट, स्वीट और अंडरस्टैन्डिंग लड़की है। अच्छी रेप्यूटेशन होनी बहुत ज़रूरी है। रेप्यूटेशन नहीं तो कुछ नहीं।

और आपके हिसाब से ज़िंदगी में सबसे महत्वपूर्ण क्या चीज़े होती हैं?
स्टडीज़- अगर आप लाइफ में कुछ बनना चाहते हो तो स्टडीज़ बहुत ज्यादा ज़रूरी हैं। और इसके बाद टीवी, टैबलेट्स, फेसबुक, मोबाइल, मूवीज़ और फैशन...

आप अपने फ्रैंड्स कैसे चुनती हो, मतलब कैसे लोगों को फ्रैंड बनाना पसंद करती हो?
जो मेरी एज के हों, स्वीट हो, लविंग हो, फ्रैंडली हो, मेरी तारीफ करे, मुझे कॉम्पलिमेंट्स दें। मुझसे चिढ़े ना और मेरी किसी बात पर ओवररिएक्ट ना करे।

आपको अपने भारत देश की किस चीज़ से चिढ़ है?
गंदगी से। और कंट्रीज इतनी नीट एंड क्लीन होती हैं पर हमारा इंडिया बहुत गंदा रहता है। यहां के लोग कितना क्राइम करते हैं। इतना प्रोटेस्ट होता रहता है लेकिन लोग सुधरते ही नहीं हैँ। यहां ब्लैक मनी भी बहुत हैं। लोग सिर्फ आपको तभी सपोर्ट करते हैं जब आप रिच हों। और एक जो सबसे बड़ी प्रॉब्लम जो मुझे लगती है वो यह कि यहां के लोगों को एंगर कंट्रोल करना नहीं आता। ज़रा-ज़रा सी बात पर कहीं भी खड़े होकर लड़ने-झगड़ने और चिल्लाने लगते हैं।

अगर आपको इंडिया का प्राइम मिनिस्टर बनाया जाए तो आप क्या क्या काम करोगी?
मैं कंट्री को नीट रखने के लिए स्ट्रिक्ट कानून बनाऊंगी। इसके बाद इतने सारे केसेज जो लटके रहते हैं और जिनका फैसला नहीं होता उनके लिए कानून बनाऊंगी कि केस जल्दी से जल्दी सॉल्व किए जाएं। और सबसे इम्पॉर्टेन्ट बात, मैं यह कानून बनाऊंगी कि इंडिया में हर तीन घंटे में फैशन बदलना चाहिए और सारे लोगों को उसे फॉलो करना चाहिए।  मैं यह कानून लागू करूंगी कि सारे बच्चों को उनके मम्मी-पापा उनके मनपसंद गेम्स दिलाएं, उन्हें मना ना करें। स्कूल की सारी क्लासेज में स्मार्ट बोर्ड और एसी होना ही चाहिए, मैं इसे भी कम्पलसरी कर दूंगी।

अगर तुम्हें एक बार मौका मिले कि तुम अपनी मर्जी से कुछ भी चेंज कर सकती हो तो क्या चेंज करोगी।
पहले तो मैं अपने घर को बंग्ले में कन्वर्ट कर दूंगी और दूसरे अपनी गाड़ी मर्सिडीज़ गाड़ी में बदल दूंगी और वो भी पांच करोड़ साठ लाख रुपए वाली मर्सिडीज़ में।

भगवान तुमसे तीन दुआएं मांगने को कहे तो क्या मांगोगी?
पहली यह कि कभी मेरे गन्दे मार्क्स ना आएं। दूसरी कॉपी में सारा काम हमेशा कम्पलीट रहे और तीसरी यह कि मुझे मम्मी-पापा कभी भी डांटे नहीं।

(For Sakshi :-))