Friday, 18 October 2013

सकारात्मक सोच, ऊंचे सपनों और बुलंद हौसलों का नाम है "मलाला"


अब तक कई बार मलाला का नाम सुना था लेकिन कभी ठीक से जानने की कोशिश नहीं की कि क्यों मलाला युसुफज़ई इतनी मशहूर हो गई, क्यों दुनिया भर में लोग उसकी ज़िंदगी की दुआएं मांग रहे हैं और क्यों उसके नाम से पुरुस्कारों की घोषणा की जा रही हैं....
 सिर्फ कुछ ऐसा ही पता था कि उसने तालिबानी हुक्म के खिलाफ लड़कियों के स्कूल जाने का अभियान चलाया था जिसके बाद तालिबानी आतंकियों ने उसे गोली मार दी और बहुत मुश्किल के बाद उसे बचाया जा सका। आज इत्तिफाक से सीएनएन पर उसका इंटरव्यू देखने को मिला। तब पहली बार सोलह साल की इस जीवट किशोरी को देखा, सुना तो जाना कि कौन और "क्या" है मलाला...।

पहली बार जाना कि हिम्मत का उम्र से कोई वास्ता नहीं। हिम्मत कभी भी आ सकती है और कहीं भी आ सकती है। संगीनों और तालिबानी आतंक के साये में एक किशोरी के पढ़ने का जुनून जीत गया। गोली खाकर भी वो ज़िदा रही और आज मिसाल बनकर तमाम दुनिया को हिम्मत दे रही है। इस सोलह साल की लड़की के आत्मविश्वास से लबरेज चेहरे पर मुस्कान थी और वो हर सवाल का बहुत शांति, मुस्कुराहट और विश्वास के साथ जवाब दे रही थी।

मलाला से जब पूछा गया कि क्या सोचकर तुमने तालिबानी फरमान के लड़कियों को स्कूल ना जाने देने वाले फतवे के खिलाफ जाने का फैसला किया तो इस बहादुर किशोरी का जवाब था कि "मार तो वो हमें वैसे भी देते मैंने सोचा कि क्यों ना मरने से पहले अपनी आवाज़ लोगों तक पहुंचाई जाए।"....इतनी हिम्मत होना वो भी इस नादान उम्र में...तो यह है मलाला

उसने बताया कि जब गोली लगने के बाद अस्पताल में उसकी आंखे खुली तब उसे सबसे ज्यादा इस बात की खुशी हुई कि वो ज़िन्दा हैं। गोली ने उसके कान और शरीर के कुछ अन्य हिस्सों को स्थायी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन वो यह सोचकर परेशान नहीं थी कि गोली ने उससे क्या छीन लिया बल्कि यह सोचकर खुश थी कि गोली क्या नहीं छीन पाई.... उसकी रीढ़ की हड्डी को नुकसान नहीं पहुंचा..., वो ज़िन्दा है.., सबके सामने हैं, सबसे बात कर रही है और अपना संदेश दुनिया तक पहुंचा रही है इससे बढ़कर खुशी की बात उसके लिए कोई नहीं.....-सकारात्मक सोच से भरपूर मलाला।

और जब उससे यह पूछा गया कि आप दुनिया को क्या संदेश देना चाहेंगी तो उसने कहा  कि "मैं सभी देशो के लोगों से कहना चाहूंगी कि वो पढ़े,आगे बढ़े, क्योंकि हमारे लिए यह आसान बिल्कुल नहीं है। दुनिया में आपमें से जिस जिस को पढ़ने का मौका मिला है उसका पूरा फायदा उठाइए। आप नहीं जानते कि जब आपका पढ़ने का अधिकार छीन लिया जाता है तो कैसा लगता है। यह बहुत बड़ी बात है कि आपको स्कूल जाने का, अध्यापको को जानने और उन्हें समझने का मौका मिला है। इसका खूब उपयोग करिए और खूब पढ़िए".... तालीम की रौशनी से रौशन होने का संदेश देने वाली मलाला

 पहले डॉक्टर बनने की चाह रखने वाली मलाला अब राजनीतिज्ञ बनना चाहती है। उन्हीं के शब्दों में "जब मैं स्वात में थी तो हमारी क्लास में हर लड़की डॉक्टर या टीचर बनना चाहती थी। वहां लड़कियों की ज़िंदगी का यहीं हाल होता है। या तो पढ़ लिखकर डॉक्टर या टीचर बन जाओ या ज़िंदगी भर एक गृहिणी बन कर रहो और अपने बच्चे पालो, इसलिए मैं भी डॉक्टर बनना चाहती थी। लेकिन अब जब मुझे अपने मुल्क से बाहर आने का और बहुत सी चीज़े जानने और समझने का मौका मिला तो मैंने जाना कि डॉक्टर बनकर तो मैं सिर्फ कुछ लोगों की मदद कर सकती हूं लेकिन एक राजनीतिज्ञ बनकर मैं पूरे देश की मदद कर सकती हूं।" बेनज़ीर भुट्टो को अपना आदर्श मानने वाली मलाला अब पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनने का और अपने मुल्क की सभी लड़कियों को शिक्षा दिलवाने का सपना देखती हैं... छोटी उम्र में बड़े सपनों वाली मलाला

एक सोलह साल की बच्ची वाले सारे शौक है मलाला के। वो इस बात का ख्याल रखती है कि अपनी आवाज़ अपने भाईयों से ऊंची रखें क्योंकि पाकिस्तान में ऐसा कम होता है कि महिलाओं की आवाज़ पुरुषों के सामने निकले इसलिए वो अपने भाईयों से ऊंची आवाज़ में झगड़ा करके यह इच्छा पूरी करती हैं। पश्तो संगीत और गानों के अलावा मलाला को जस्टिन बीबर को सुनने का भी शौक है और जब भी मौका मिलता है वो अपना यह शौक पूरा करती हैं......तो एक आम किशोरी की तरह ही है मलाला।

अपनी मां द्वारा पर्दा रखने पर जोर देने पर बोलते हुए मलाला ने बताया कि उनकी मां जब भी उनके साथ बाहर कहीं जाती थी वो हमेशा मलाला को यहीं बोलती रहती थी कि अपना चेहरा ढको अपना चेहरा ढको... देखो यह आदमी तुम्हें देख रहा है, देखो वो आदमी तुम्हें देख रहा है और मलाला कहती थी कि देखनो दो ना अम्मी मैं भी तो उन्हें देख रही हूं... मलाला का यह रूप भी है

और जब मलाला यूसुफजई के सामने यह सवाल आया कि क्या उसे आतंकियो से डर नहीं लगता वो तो ताक में बैठे हैं, उसे दोबारा मारने की कोशिश भी तो कर सकते हैं। तो मलाला का जवाब था "वो मेरे शरीर को ज़रूर मार सकते हैं लेकिन मेरे सपनों को नहीं.. मेरे सपने हमेशा जिन्दा रहेंगे।".... जी हां ऐसी है मलाला।  

well... I am impressed :-)