Monday, 26 August 2013

शरीर और मन को एक सूत्र में बांध देता है योग

योग के साथ मेरे अनुभव
योग में जाकर ही अपने शरीर और मन की शक्ति को जाना जा सकता है
लम्बे और सुखी जीवन की कुंजी है प्राणायाम
मंत्र और योग-निद्रा तनाव दूर करके मन में खुशी भर देते हैं

योग क्या है, इसे कैसे करते हैं, इसके क्या फायदे हैं, इसके बारे में सुना ज़रूर था लेकिन अब से एक साल पहले तक कभी भी किसी योग्य गुरू के सानिध्य में योग करने का मौका नहीं मिला। फिर यह भी सुन रखा था कि योग के लिए योग्य गुरु अत्यन्त आवश्यक है। अगर गलत तरीके से योग किया जाए तो नुकसान ज़्यादा होता है फायदा कम... और चूंकि यहां घर के आसपास कोई अच्छा योग संस्थान नहीं था नहीं इसलिए योग करने का मौका ही नहीं मिला।

जब भी वज़न घटाने का मन हूआ जिम ही जाना पड़ा। काफी दिनों तक भी जब कोई परिणाम नहीं मिले मैंने जिम बीच में ही छोड़ दिया और योगा कक्षा की तलाश शुरू की।
आखिरकार पास ही में बापू नेचर क्योर अस्पताल में योग कक्षाओं का पता चला और मैंने उसमें जाना शुरू कर दिया....
पहली ही क्लास में योग करते हुए इतना ज़्यादा अच्छा लगा कि मैंने उसी समय ठान लिया कि अब योगा ही करना है... जैसे जैसे मैं योगा करती गई, इसे जानती गई, और प्राणायाम करना भी मुझे आने लगा मुझे अच्छा महसूस होने लगा साथ ही तनाव भी काफी हद तक कम हो गया।

जहां अब तक जिम में मैं मशीनों की सहायता से व्यायाम करती थी और काफी थक भी जाती थी वहीं योग ने मुझे मेरे खुद के शरीर के प्रयोग से व्यायाम करना सिखाया। यहां कोई मशीन नहीं थी- सिर्फ एक दरी..., खिड़की, दरवाज़ो और रौशनदानों से भरपूर खुला हुआ हवादार कमरा, दीवारों पर ओम की तस्वीरें, शांत माहौल और योग गुरू की आवाज़।
हमारा योग कक्ष
जिम में जहां मैं कई बार तेज़ आवाज़ में बजते गानों की आवाज़ से परेशान हो जाती थी वहीं योग-कक्ष का यह सौम्य वातावरण बेहद शांत अनुभूति देता था। तीसरी मंजि़ल पर बने हमारे साफ-सुथरे, गोबर से लिपी दीवारों और बांस और फूस की बनी ढालू छत वाले योग कक्ष की खिड़कियों से कहीं नीम के वृक्ष की कोमल टहनियां अंदर झांकती थी तो कहीं से सदाबहार के रंग-बिरंगे फूल...

इस कक्ष में आकर ही इतना अच्छा महसूस होता था कि अपने आप मन योग को करने लगेगा। हमारे योग की शूरूआत ओम् के उच्चारण से होती है। हम सभी अपनी-अपनी दरी पर आलथी-पालथी मार कर बैठ जाते हैं और ध्यानावस्था में आंखे बन्द करके सबसे पहले तीन बार ओम् का उच्चारण जिसे हमारे योग गुरू रवीन्द्र जी उदरध्वनि प्राणायाम कहते हैं, करते हैं।

हमारे योग गुरू रवीन्द्र सर
तीन बार सांस के साथ ओम् का उच्चारण और उसके बाद तीन बार गायत्री मंत्र का जाप... इसके बाद हम दोनों हाथों को आपस में रगड़कर गर्म हो चुकी हथेलियों को बंद आंखो पर रखते हैं और उसके बाद धीरे-धीरे आंखे खोलते हैं.... शुरूआत में ही योग की यह प्रार्थना बेहद सुकून देती है। मन में शांति का अहसास होता है.... बहुत अच्छा लगता है।
शुरूआती प्रार्थना के बाद थोड़ा सा वॉर्म-अप व्यायाम- जिसमें चक्की चालन, नौका चालन, बटरफ्लाई और कुछ ऐसे ही थोड़े बहुत शारीरिक व्यायाम होते हैं जिन्हें लगभग 15 मिनट तक धीरे-धीरे करने के बाद हम योग शुरू करते हैं।

योग की शुरूआत होती है सूर्य नमस्कार से। जो शरीर की 13 अवस्थाओं से मिलकर बना एक चक्र है और अपने आप में संपूर्ण व्यायाम माना जाता है। अगर आपने योग शुरू ही किया है तो विश्वास कीजिए जिम में घंटो मशीनों के साथ एक्सरसाइज़ करते या ट्रेडमिल पर दौड़ते हुए भी आपको इतना पसीना नहीं आता होगा जितना की सूर्य नमस्कार के सिर्फ तीन चक्र करने पर आ जाएगा। और आपके पूरे शरीर के हर जोड़ का व्यायाम हो जाएगा सो अलग।

खैर हम लोग तो रोज़ सूर्य नमस्कार के बारह से पंद्रह चक्र करते हैं। और इसके बाद पांच मिनट तक शवासन में विश्राम के बाद शुरू होते हैं अन्य योग... जैसे ताड़ासन, वृक्षासन, वीरभद्र आसन, कटिचक्रआसन, त्रिकोणासन, पवनमुक्त आसन, उत्थान पाद आसन, सर्वांगासन, हलासन, नौकासन, धनुरासन, भुजंगासन, गौमुख आसन आदि... इनमें से हर रोज़ कुछ कुछ, अलग-अलग आसन किए जाते हैं। हर आसन शरीर के एक विशेष हिस्से को सुदृढ़ और कुशल बनाने के लिए होता है...
योग कक्ष में शवासन में आराम

 योग का एक सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसका हर आसन आपके शरीर के लचीलेपन को बढ़ाता है और चूंकि सभी आसन सांस के साथ किये जाते हैं, यह सांस के प्रति आपकी सजगता को बढ़ाते हैं। हर आसन के साथ आप अपने शरीर को और जान पाते हैं।

यह जिम जैसा बेहद थकाने वाला व्यायाम नहीं है बल्कि हर बार योगासन करके बहुत अच्छा लगता है। शुरूआत में आप किसी आसन को नहीं कर पाते और उसे लगातार करने की कोशिश करते हैं और फिर कुछ समय के बाद जब अभ्यास के साथ आप उस योगासन को करना सीख जाते हैं तो बेहद खुशी का अनुभव होता है।
हर आसन को कुशलता के साथ करना सीख लेने के साथ आपकी अपने शरीर और सांसो के प्रति सजगता और लचीलापन बढ़ता जाता है। और अगर आपका वज़न ना भी घटे तो शरीर का अच्छी शेप में आना तय है और वो भी जिम के व्यायाम से कहीं जल्दी और सरलता से।

योग का एक महत्वपूर्ण भाग है प्राणायाम जिसे आमतौर पर योगाभ्यास के बाद किया जाता है। सभी योग हो जाने के बाद पांच मिनट तक शवासन या बालासन में विश्राम के बाद फिर से आलती पालथी मार कर बैठते हैं और प्राणायाम करते हैं। कपाल भांति प्राणायाम और अनुलोम विलोम प्राणायाम तो हम लगभग रोज ही करते हैं, लेकिन यहां आकर मैंने और भी प्राणायाम जैसे नाड़ी शोधन, भ्रामरी, बाह्यान्त्र, अभ्यान्त्र, उज्जयी प्राणायाम आदि के बारे में जाना और उन्हें करना सीखा...

प्राणायाम शरीर के बंधों के साथ किए जाते हैं जिनमें मूल बंध, जालंधर बंध और उड्डयान बंध होते हैं। इन बंधो को लगाना सीखने के बाद आपको अपने शरीर पर अच्छे से नियंत्रण करना आ जाता है। शरीर का पोश्चर अच्छा हो जाता है। शरीर का संतुलन बढ़ जाता है। योगा करने के बाद ही मैं जान पाईं कि हमारे शरीर और सांसों में एक रिद्म होता है, शरीर के हर भाग और सांसो पर नियंत्रण मुकम्मल करता है योग।

प्राणायाम करते लोग
यहां आकर मैंने जलनेति भी सीखा...यानि एक नाक से पानी अंदर लेकर दूसरी नाक से निकालना... सुनने में ज़रूर मुश्किल है लेकिन एक बार जो योग करने लगे उसके लिए सबकुछ आसान हो जाता है... जलनेति नाक को साफ करने, ज़ुकाम, खांसी और यहां तक साइनस से भी लड़ने का बेहद अच्छा उपाय है। और जिन लोगों को खर्राटों की परेशानी है उनके लिए तो जलनेति से अच्छा कोई इलाज ही नहीं। मैंने यहां बहुत से लोगों को खर्राटों के इलाज के लिए जलनेति और सूत्रनेति करने आते देखा है।

एक और चीज़ का ज़िक्र ज़रूरी है और वो है योग निद्रा.... शरीर और मन का आराम क्या होता है, शरीर के हर छोटे से छोटे अंग को कैसे जाना और समझा जा सकता है और कैसे तनाव से मुक्ति पाकर पूर्ण आराम की अवस्था में पहुंचा जा सकता है... यह मुझे योग निद्रा ने समझाया। योग निद्रा- वो निद्रा जिसमें हम सोते नहीं बस बाहरी संसार से विमुख होकर अपने शरीर और मन के प्रति सजग हो जाते हैं और असीम शांति का अनुभव करते हैं।

योगा में आकर जाना कि मंत्रों का भी हमारे शरीर और मन पर बेहद प्रभाव पड़ता है। गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र मन की चेतना और स्वास्थ्य के लिए अमृत सरीखे हैं।

जिम ने मुझे शरीर को थका कर पसीना बहाना सिखाया था और योगा ने मुझे शरीर को जानना सिखाया। योगा में आकर जाना कि आप सब कुछ अपने शरीर से ही पा सकते हैं, सिर्फ मन और शरीर को एकसार करने की ज़रूरत है। आपके शरीर में ही हर बीमारी का इलाज है बस योग से उस शक्ति को जगाने की ज़रूरत है। जिम आपके शरीर को मज़बूत बनाता है और योग शरीर में छिपी मज़बूती को सामने लाता है।

प्राणायाम सांसों की गति को जानना, समझना और उन्हें बढ़ाना सिखाते हैं। वायु या सांस को योग में प्राण कहते हैं, और प्राणायाम प्राण को बस में करने की तकनीक है। बस एक बार प्राण आपके बस में आ जाए, शरीर आपके नियंत्रण में अपने आप आ जाएगा... और फिर एक स्वस्थ शरीर और दिमाग के साथ जीवन जीने का आनंद और खुशी दोगुनी हो जाएगी।

(यह मेरा अपना अनुभव और विचार हैं। इसको लिखने का मकसद जिम जाने वालों को हतोत्साहित करना बिल्कुल नही ंहै, हां पर कम एक बार योगा करने के लिए प्रोत्साहित करना ज़रूर है)